शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जायगे, मर के भी चैन न पाया तो किधर जायेगे

अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जायगे
मर के भी चैन न पाया तो किधर जायेगे /
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जौक साहिब का लिखा ये शेर है /

झगड़े, विवाद, समस्या, दुःख, जीवन मे बहुत कुछ सीखने के लिए है / हमारी सहनशक्ति का इंतिहान है दुःख /

फिर भी कोई समस्या हो तो मनोविज्ञानिक से सलाह ले /

आत्महत्या का बिचार आये तो मनोचिकित्सक से ईलाज करवाये /

आत्महत्या कोई समाधान नहीं है / आत्महत्या करने मे इतनी जल्दवाजी क्यों ?
थोड़ा रुको तो सही /

हिन्दू धर्म मे आत्महत्या करने वाले का अंतिम संस्कार के लिए माना कर दिया है /

माँ,  बाप, भाई और बहन चलती फिरती लाश बन जाते है /
परिवार मे अन्य सदस्यों के आत्महत्या करने की सम्भावना बढ़ जाती है /

मेरा शरीर मेरे माँ बाप का पाला पोसा है / माँ ने ९ महीने गर्भ मे रखा है / दूध पिलाया है/ दर्द सहा है /
रात दिन की मेहनत है /  इस शरीर को स्वस्थ रखने की मेरी नैतिक जिम्मेदारी बनती है /

माँ की मेहनत को सफल बनाओ / जीवत रहो / स्वस्थ रहो /

 www.jenedo.blogspot.in

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